मसनून दुआएं हिंदी में — अरबी, उच्चारण और मतलब
रोज़मर्रा की ज़िंदगी की सही दुआएं: अरबी इबारत, हिंदी में उच्चारण, हिंदी मतलब और हर दुआ का हवाला।
इस वक़्त की दुआसोने की दुआ
بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
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- सोने की दुआऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से मैं मरता (सोता) हूं और जीता (जागता) हूं।بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
- जागने की दुआसब तारीफ़ अल्लाह के लिए है जिसने हमें मौत (नींद) के बाद ज़िंदगी दी, और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
- खाना खाने की दुआअल्लाह के नाम से। (अगर शुरू में भूल जाएं तो:) अल्लाह के नाम से, इसके शुरू में भी और आख़िर में भी।بِسْمِ اللَّهِ
- खाना खाने के बाद की दुआसब तारीफ़ अल्लाह के लिए है जिसने मुझे यह खिलाया और मेरी किसी ताक़त और क़ुव्वत के बग़ैर मुझे यह रिज़्क़ दिया।الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ
- घर से निकलने की दुआअल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, और अल्लाह के बग़ैर न कोई ताक़त है न क़ुव्वत।بِسْمِ اللَّهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
- बैतुल ख़ला में जाने की दुआऐ अल्लाह! मैं नापाक जिन्नों (मर्द और औरत) और हर ख़बीस चीज़ से तेरी पनाह मांगता हूं।اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ
- बैतुल ख़ला से निकलने की दुआ(ऐ अल्लाह!) मैं तुझसे माफ़ी मांगता हूं।غُفْرَانَكَ
- छींक आने की दुआ और जवाबसब तारीफ़ अल्लाह के लिए है। (जवाब:) अल्लाह तुम पर रहम करे। (फिर:) अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारा हाल दुरुस्त करे।الْحَمْدُ لِلَّهِ
- वज़ू के बाद की दुआमैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, और मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
- मस्जिद में दाख़िल होने की दुआऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
- मस्जिद से निकलने की दुआऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूं।اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
- सफ़र की दुआपाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे क़ाबू में कर दिया, हालांकि हम इसे क़ाबू में करने वाले न थे, और बेशक हम अपने रब की तरफ़ लौटने वाले हैं।سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ، وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ
- रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ)प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं, और अगर अल्लाह ने चाहा तो अज्र पक्का हो गया।ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
- रब्बना आतिना फ़िद्दुन्याऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
- वालिदैन (मां-बाप) के लिए दुआऐ मेरे रब! उन दोनों पर रहम फ़रमा जैसे उन्होंने बचपन में मेरी परवरिश की।رَّبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًا
- इल्म में इज़ाफ़े की दुआऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फ़रमा।رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
- दुआ-ए-यूनुसतेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ही ज़ालिमों में से था।لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
- परेशानी, ग़म और क़र्ज़ से निजात की दुआऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूं फ़िक्र और ग़म से, आजिज़ी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, और क़र्ज़ के बोझ और लोगों के ग़लबे से।اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
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