دعاءमसनून दुआएं
हिन्दी

परेशानी, ग़म और क़र्ज़ से निजात की दुआ

सुबह-शाम, या जब भी फ़िक्र या क़र्ज़ का बोझ हो।

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ

अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल हम्मि वल हज़न, वल अज्ज़ि वल कसल, वल बुख़्लि वल जुब्न, व ज़लइद्दैनि व ग़लबतिर्रिजाल

ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूं फ़िक्र और ग़म से, आजिज़ी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, और क़र्ज़ के बोझ और लोगों के ग़लबे से।

WhatsApp पर शेयर करें 0

हवाला

Sahih al-Bukhari 6369

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

परेशानी, ग़म और क़र्ज़ से निजात की दुआ का मतलब क्या है?

ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूं फ़िक्र और ग़म से, आजिज़ी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, और क़र्ज़ के बोझ और लोगों के ग़लबे से।

परेशानी, ग़म और क़र्ज़ से निजात की दुआ कब पढ़ी जाती है?

सुबह-शाम, या जब भी फ़िक्र या क़र्ज़ का बोझ हो।

परेशानी, ग़म और क़र्ज़ से निजात की दुआ का हवाला क्या है?

यह दुआ Sahih al-Bukhari 6369 में दर्ज है।

परेशानी, ग़म और क़र्ज़ से निजात की दुआ अरबी में क्या है?

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ (अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल हम्मि वल हज़न, वल अज्ज़ि वल कसल, वल बुख़्लि वल जुब्न, व ज़लइद्दैनि व ग़लबतिर्रिजाल)

और दुआएं

भाषा