सफ़र और रमज़ान
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- सफ़र की दुआपाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे क़ाबू में कर दिया, हालांकि हम इसे क़ाबू में करने वाले न थे, और बेशक हम अपने रब की तरफ़ लौटने वाले हैं।سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ، وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ
- रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ)प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं, और अगर अल्लाह ने चाहा तो अज्र पक्का हो गया।ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ