सफ़र की दुआ
सफ़र की शुरुआत में सवारी पर बैठते वक़्त। पूरी दुआ सहीह मुस्लिम 1342 में है।
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ، وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ
सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा व मा कुन्ना लहू मुक़्रिनीन, व इन्ना इला रब्बिना लमुन्क़लिबून
पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे क़ाबू में कर दिया, हालांकि हम इसे क़ाबू में करने वाले न थे, और बेशक हम अपने रब की तरफ़ लौटने वाले हैं।
हवाला
Quran 43:13–14; Sahih Muslim 1342
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सफ़र की दुआ का मतलब क्या है?
पाक है वह ज़ात जिसने इसे हमारे क़ाबू में कर दिया, हालांकि हम इसे क़ाबू में करने वाले न थे, और बेशक हम अपने रब की तरफ़ लौटने वाले हैं।
सफ़र की दुआ कब पढ़ी जाती है?
सफ़र की शुरुआत में सवारी पर बैठते वक़्त। पूरी दुआ सहीह मुस्लिम 1342 में है।
सफ़र की दुआ का हवाला क्या है?
यह दुआ Quran 43:13–14; Sahih Muslim 1342 में दर्ज है।
सफ़र की दुआ अरबी में क्या है?
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ، وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ (सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा व मा कुन्ना लहू मुक़्रिनीन, व इन्ना इला रब्बिना लमुन्क़लिबून)