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रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ)

इफ़्तार के वक़्त रोज़ा खोलने के बाद।

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

ज़हबज़्ज़मउ वब्तल्लतिल उरूक़ु व सबतल अज्रु इन शा अल्लाह

प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं, और अगर अल्लाह ने चाहा तो अज्र पक्का हो गया।

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हवाला

Sunan Abi Dawud 2357

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ) का मतलब क्या है?

प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं, और अगर अल्लाह ने चाहा तो अज्र पक्का हो गया।

रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ) कब पढ़ी जाती है?

इफ़्तार के वक़्त रोज़ा खोलने के बाद।

रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ) का हवाला क्या है?

यह दुआ Sunan Abi Dawud 2357 में दर्ज है।

रोज़ा खोलने की दुआ (इफ़्तार की दुआ) अरबी में क्या है?

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ (ज़हबज़्ज़मउ वब्तल्लतिल उरूक़ु व सबतल अज्रु इन शा अल्लाह)

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